केतु रत्न को हिंदी में लहसुनिया, कैट्स आई स्टोन या वैदूर्य मणि भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में यह रत्न केतु ग्रह से जुड़ा माना जाता है। केतु को एक छाया ग्रह कहा जाता है, जो व्यक्ति के जीवन में अचानक होने वाले बदलाव, आध्यात्मिक झुकाव, रहस्य और कर्मों से जुड़ा होता है। जब कुंडली में केतु कमजोर या अशुभ स्थिति में होता है, तो व्यक्ति को बिना कारण डर, भ्रम, दुर्घटनाएं, मानसिक अशांति और जीवन में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में केतु रत्न धारण करना लाभकारी माना जाता है।
केतु रत्न मुख्य रूप से सुरक्षा, मानसिक स्थिरता, आध्यात्मिक उन्नति और अचानक आने वाली परेशानियों से बचाव के लिए पहना जाता है। नीचे केतु रत्न के सभी प्रमुख लाभ विस्तार से बताए गए हैं।
केतु रत्न के ज्योतिषीय और आध्यात्मिक फायदे
अचानक परेशानियों से सुरक्षा
केतु रत्न का सबसे बड़ा लाभ यह माना जाता है कि यह अचानक आने वाली समस्याओं से बचाव करता है। दुर्घटना, चोट, ऑपरेशन, कानूनी झंझट या बिना वजह होने वाले नुकसान से सुरक्षा देने में यह रत्न सहायक माना जाता है। जिन लोगों के जीवन में बार-बार अनचाही घटनाएं होती हैं, उनके लिए केतु रत्न उपयोगी हो सकता है।
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नकारात्मक ऊर्जा और डर से राहत
केतु रत्न को एक शक्तिशाली सुरक्षा कवच माना जाता है। यह बुरी नज़र, नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र-मंत्र और मानसिक डर से बचाने में मदद करता है। जो लोग हमेशा किसी अनजाने भय, घबराहट या असुरक्षा की भावना में रहते हैं, उन्हें केतु रत्न से मानसिक मजबूती मिलती है।
आध्यात्मिक झुकाव और आत्मज्ञान
केतु ग्रह आध्यात्मिकता और वैराग्य का कारक माना जाता है। केतु रत्न पहनने से व्यक्ति का झुकाव ध्यान, साधना और आत्मचिंतन की ओर बढ़ता है। जो लोग मंत्र जाप, ध्यान या आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए यह रत्न सहायक हो सकता है।
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भ्रम और गलत फैसलों से बचाव
केतु के अशुभ प्रभाव में व्यक्ति भ्रमित रहता है और सही-गलत का निर्णय नहीं ले पाता। केतु रत्न पहनने से सोच स्पष्ट होती है और व्यक्ति को सही दिशा में निर्णय लेने में मदद मिलती है। यह मानसिक उलझन को कम करता है और आत्मविश्वास को संतुलित करता है।
कोर्ट-कचहरी और शत्रु बाधा में लाभ
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार केतु रत्न शत्रुओं से रक्षा करता है और कोर्ट-कचहरी के मामलों में भी राहत दे सकता है। यह छुपे हुए शत्रुओं और षड्यंत्रों से बचाने में सहायक माना जाता है।
केतु रत्न के मानसिक लाभ
केतु रत्न मानसिक शांति देने में सहायक माना जाता है। यह बेचैनी, अनिद्रा, बुरे सपने और बिना वजह आने वाली नकारात्मक सोच को कम करता है। जिन लोगों को अकेलापन, डर या मानसिक दबाव महसूस होता है, उनके लिए यह रत्न सहायक हो सकता है। यह मन को स्थिर करता है और अंदरूनी शक्ति को बढ़ाता है।
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केतु रत्न के शारीरिक फायदे
रोगों और कमजोरी में सहायक
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार केतु रत्न पुराने रोगों, रहस्यमयी बीमारियों और बिना कारण होने वाली शारीरिक समस्याओं में लाभ दे सकता है। यह शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है और कमजोरी को कम करने में मदद करता है।
त्वचा और नसों से जुड़ी समस्याएं
केतु से जुड़ी समस्याओं में त्वचा रोग, एलर्जी और नसों से जुड़ी परेशानियां मानी जाती हैं। केतु रत्न को पहनने से इन समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है, हालांकि इसे मेडिकल इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
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केतु रत्न कैसे धारण करें
केतु रत्न को सही विधि से पहनना बहुत जरूरी माना जाता है। आमतौर पर इसे दाहिने हाथ की मध्य उंगली या कनिष्ठा उंगली में पहना जाता है। इसे चांदी की अंगूठी में जड़वाना शुभ माना जाता है।
मंगलवार या गुरुवार के दिन केतु रत्न धारण करना अच्छा माना जाता है। धारण करने से पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध किया जाता है और फिर मंत्र जाप के साथ पहनने की परंपरा है।
केतु रत्न पहनते समय सावधानियां
केतु रत्न बहुत प्रभावशाली माना जाता है, इसलिए इसे बिना कुंडली जांच के नहीं पहनना चाहिए। गलत व्यक्ति के लिए यह रत्न लाभ की जगह परेशानी भी बढ़ा सकता है। गर्भवती महिलाएं, गंभीर मानसिक समस्या से जूझ रहे लोग और छोटे बच्चे इसे बिना विशेषज्ञ सलाह के न पहनें। हमेशा किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेकर ही केतु रत्न धारण करना सुरक्षित माना जाता है।
निष्कर्ष
केतु रत्न उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है, जिनकी कुंडली में केतु अशुभ स्थिति में हो या जो जीवन में अचानक आने वाली परेशानियों से जूझ रहे हों। यह रत्न सुरक्षा, मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव में सहायक माना जाता है। सही सलाह और सही विधि से धारण किया जाए, तो केतु रत्न जीवन में स्थिरता और संतुलन लाने में मदद कर सकता है।
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