बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि एक साथ कितने रत्न पहनना सही होता है। कुछ लोग एक से ज्यादा रत्न पहनना चाहते हैं ताकि जीवन की अलग-अलग समस्याओं से राहत मिल सके, लेकिन बिना सही जानकारी के ऐसा करना नुकसान भी दे सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रत्न केवल गहना नहीं होते, बल्कि वे ग्रहों की ऊर्जा को शरीर तक पहुंचाने का माध्यम होते हैं। इसलिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि कौन-सा रत्न, कितनी संख्या में और किसके साथ पहनना चाहिए।
रत्नों की संख्या कुंडली पर क्यों निर्भर करती है?
आप एक साथ कितने रत्न पहन सकते हैं, यह पूरी तरह आपकी जन्म कुंडली, ग्रहों की स्थिति और उनके आपसी संबंधों पर निर्भर करता है। हर रत्न किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है। अगर आपकी कुंडली में दो ग्रह मित्र हैं, तो उनसे जुड़े रत्न एक साथ पहनने से अच्छा फल मिल सकता है। लेकिन अगर ग्रह आपस में शत्रु हैं, तो उनके रत्न एक साथ पहनने से लाभ की जगह परेशानी भी आ सकती है।
इसी वजह से यह मानना गलत है कि जितने ज्यादा रत्न पहनेंगे, उतना ज्यादा फायदा होगा। कई बार कम रत्न पहनना ही ज्यादा सही और सुरक्षित होता है।
सामान्य रूप से कितने रत्न पहनना सुरक्षित माना जाता है?
ज्योतिष में सामान्य तौर पर माना जाता है कि:
- एक रत्न पहनना सबसे सुरक्षित होता है
- दो अनुकूल रत्न एक साथ पहने जा सकते हैं
- तीन रत्न केवल विशेष परिस्थितियों में और विशेषज्ञ की सलाह से ही पहनने चाहिए
बिना कुंडली देखे 3 या उससे ज्यादा रत्न पहनना सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे ग्रहों की ऊर्जा आपस में टकरा सकती है।
अनुकूल रत्न संयोजन (जो आमतौर पर साथ पहने जा सकते हैं)
कुछ रत्न ऐसे होते हैं जो मित्र ग्रहों से जुड़े होते हैं और एक साथ पहनने पर अच्छे परिणाम देते हैं।
पुखराज (बृहस्पति) और मोती (चंद्रमा)
यह संयोजन ज्ञान, मानसिक शांति और भावनात्मक स्थिरता के लिए अच्छा माना जाता है। पढ़ाई, करियर और पारिवारिक जीवन में संतुलन लाने में सहायक हो सकता है।
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पन्ना (बुध) और हीरा (शुक्र)
यह संयोजन बुद्धि, संवाद क्षमता और भावनात्मक संतुलन के लिए उपयोगी माना जाता है। कला, व्यापार और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को इससे लाभ मिल सकता है।
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मूंगा (मंगल) और पुखराज (बृहस्पति)
यह संयोजन साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। विशेष रूप से वृश्चिक राशि के जातकों के लिए इसे शुभ माना जाता है, लेकिन फिर भी कुंडली जांच ज़रूरी है।
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गोमेद (राहु) और लहसुनिया (केतु)
यह संयोजन नकारात्मक ऊर्जा से बचाव, भ्रम से मुक्ति और एकाग्रता बढ़ाने के लिए पहना जाता है। राहु-केतु से जुड़ी समस्याओं में यह सहायक हो सकता है।
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वर्जित रत्न संयोजन (जिन्हें साथ नहीं पहनना चाहिए)
कुछ रत्न ऐसे होते हैं जिन्हें एक साथ पहनना ज्योतिष में वर्जित माना गया है, क्योंकि इनके ग्रह आपस में शत्रु होते हैं।
- हीरा के साथ माणिक्य, मोती, मूंगा और पुखराज नहीं पहनना चाहिए
- नीलम के साथ माणिक्य, मोती और पुखराज वर्जित माने जाते हैं
- गोमेद के साथ माणिक्य, मूंगा और पुखराज नहीं पहनना चाहिए
इन संयोजनों से मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है, इसलिए इन्हें बिना सलाह कभी न अपनाएं।
रत्न पहनते समय ध्यान रखने वाली मुख्य बातें
- ज्योतिषी से परामर्श: कोई भी रत्न या रत्न संयोजन पहनने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना सबसे ज़रूरी है। यही सही और सुरक्षित तरीका है।
- ग्रहों की मित्रता: हमेशा केवल मित्र ग्रहों से जुड़े रत्न ही एक साथ पहनने चाहिए। शत्रु ग्रहों के रत्न टकराव पैदा कर सकते हैं।
- रत्ती और धातु का चयन: रत्न की रत्ती (वजन) और उसे पहनने की धातु जैसे सोना, चांदी या पंचधातु भी बहुत मायने रखती है। गलत वजन या धातु से रत्न असर नहीं देता।
- धारण का सही समय: अधिकतर रत्न शुक्ल पक्ष में और विशेष वार को धारण किए जाते हैं। सही मुहूर्त भी रत्न के प्रभाव को बढ़ाता है।
निष्कर्ष
संक्षेप में कहा जाए तो आप एक साथ 2 से 3 अनुकूल रत्न पहन सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह आपकी कुंडली की स्थिति पर निर्भर करता है। बिना सही सलाह कई रत्न पहनना लाभ के बजाय हानि पहुंचा सकता है। इसलिए हमेशा विशेषज्ञ की राय लेकर ही रत्न पहनें, ताकि सही संयोजन से आपको सकारात्मक परिणाम मिल सकें और नकारात्मक प्रभाव से बचाव हो सके।
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