सनातन परंपरा में कुछ तिथियाँ ऐसी होती हैं जो जीवन के गहरे अर्थ को समझाती हैं। अक्षय तृतीया भी ऐसी ही एक पवित्र तिथि है, जिसे आखा तीज या अक्ती तीज के नाम से जाना जाता है।
इस पर्व में “अक्षय” शब्द का मतलब है – जो कभी समाप्त न हो, यानी जो हमेशा बना रहे और निरंतर बढ़ता रहे। इसी वजह से इस दिन किया गया जप, तप, दान, सेवा, हवन या कोई भी शुभ कार्य ऐसा माना जाता है जिसका फल कभी खत्म नहीं होता और लगातार बढ़ता रहता है।
वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पावन दिन हमें आध्यात्मिक उन्नति, धर्म के पालन, सेवा और अच्छे कर्मों की उस परंपरा की याद दिलाता है, जो कभी समाप्त नहीं होती।
अक्षय तृतीया क्या है (Akshaya Tritiya Kya Hai)
अक्षय तृतीया, जिसे आखा तीज भी कहा जाता है, वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए सभी शुभ कार्यों का फल कभी खत्म नहीं होता, बल्कि हमेशा बढ़ता रहता है। इसी वजह से इस तिथि को “अक्षय” तृतीया कहा जाता है।
हालांकि हर महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि शुभ मानी जाती है, लेकिन वैशाख महीने की अक्षय तृतीया को विशेष रूप से बहुत ही पवित्र और स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना गया है, जिसमें किसी भी शुभ काम को बिना पंचांग देखे भी शुरू किया जा सकता है।
अक्षय तृतीया कब है 2026 (Akshay Tritiya Kab Hai 2026)
अक्षय तृतीया, जिसे आखा तीज भी कहा जाता है, हिंदू कैलेंडर के सबसे शुभ दिनों में से एक है। यह पवित्र दिन रविवार, 19 अप्रैल 2026 को पड़ रहा है। माना जाता है कि इस दिन किए गए कार्यों से जीवन में हमेशा बनी रहने वाली समृद्धि, आध्यात्मिक विकास और सफलता प्राप्त होती है। ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ होता है “जो कभी खत्म न हो,” यानी इस दिन मिलने वाले आशीर्वाद हमेशा बढ़ते रहते हैं।
अक्षय तृतीया 2026 का पूजा मुहूर्त सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक रहेगा, जिसकी अवधि 1 घंटा 33 मिनट है। तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे शुरू होकर 20 अप्रैल 2026 को सुबह 7:27 बजे समाप्त होगी।
इस दिन श्रद्धालु दान, व्रत, पूजा, सोना खरीदना और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं। यह दिन अन्न दान (भोजन दान) और ध्यान के लिए भी बहुत शुभ माना जाता है। इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और नीम करोली बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजा की जाती है।
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अक्षय तृतीया का पौराणिक महत्व (Akshaya Tritiya Mahatva)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया एक ऐसी तिथि है जो समय के महत्वपूर्ण बदलावों की साक्षी रही है। धार्मिक कथाओं में बताया गया है कि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी थीं।
हिंदू समय गणना के अनुसार इसी तिथि पर सतयुग का अंत हुआ और त्रेतायुग की शुरुआत हुई। भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम का जन्म भी इसी दिन हुआ था। कहा जाता है कि राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा इसी दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं।
महाभारत काल में वनवास के दौरान पांडवों को सूर्यदेव से अक्षय पात्र प्राप्त हुआ, जिससे उन्हें कभी भोजन की कमी नहीं हुई। वहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा की गरीबी भी इसी पवित्र दिन दूर की थी।
अक्षय तृतीया 2026 पर कौन सा रत्न खरीदें?
अक्षय तृतीया को सोना खरीदना तो शुभ माना ही जाता है, लेकिन इस दिन रत्न खरीदना भी बहुत लाभकारी माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन खरीदा गया प्राकृतिक और असली रत्न जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और सफलता लाता है। यदि सही रत्न सही विधि से धारण किया जाए, तो इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है।
इस पावन दिन पर कुछ विशेष रत्नों को खरीदना और धारण करना बहुत शुभ माना जाता है।
पुखराज (Yellow Sapphire)
पुखराज गुरु ग्रह से जुड़ा हुआ रत्न है। इसे धन, ज्ञान और भाग्य का रत्न माना जाता है। अक्षय तृतीया पर पुखराज खरीदने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और जीवन में स्थिरता आती है। यह रत्न विशेष रूप से उन लोगों के लिए अच्छा माना जाता है जो अपने करियर और शिक्षा में उन्नति चाहते हैं।
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पन्ना (Emerald)
पन्ना बुध ग्रह का रत्न है और यह बुद्धि, संचार और व्यापार में सफलता दिलाने में मदद करता है। अक्षय तृतीया के दिन पन्ना खरीदना व्यापारियों और विद्यार्थियों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। यह मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायक होता है।
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नीलम (Blue Sapphire)
नीलम शनि ग्रह का रत्न है, जो बहुत प्रभावशाली और तेज असर देने वाला माना जाता है। अक्षय तृतीया पर नीलम खरीदने से जीवन में तेजी से सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं, लेकिन इसे पहनने से पहले किसी जानकार की सलाह लेना जरूरी होता है।
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माणिक (Ruby)
माणिक सूर्य ग्रह का रत्न है, जो आत्मविश्वास, नेतृत्व और सम्मान बढ़ाने में मदद करता है। इस दिन माणिक खरीदना करियर में आगे बढ़ने और समाज में मान-सम्मान पाने के लिए अच्छा माना जाता है।
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मोती (Pearl)
मोती चंद्र ग्रह से जुड़ा हुआ रत्न है और यह मन को शांत करता है। अक्षय तृतीया पर मोती खरीदना मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्थिरता के लिए लाभकारी होता है।
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कैसे चुनें सही रत्न?
अक्षय तृतीया पर रत्न खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। हमेशा प्राकृतिक, असली और प्रमाणित रत्न ही खरीदें। अपनी राशि या कुंडली के अनुसार रत्न चुनना ज्यादा अच्छा रहता है, ताकि उसका पूरा लाभ मिल सके।
रत्न को धारण करने से पहले सही विधि और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें। यदि संभव हो, तो किसी जानकार ज्योतिषी की सलाह जरूर लें।
अक्षय तृतीया पर दान का महत्व (Akshaya Tritiya Donation)
अक्षय तृतीया के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया दान कभी व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि उसका पुण्य हमेशा बढ़ता रहता है।
“अक्षय तृतीयायां दानं, पुण्यं च न क्षीयते।”
अर्थात इस दिन किया गया दान और प्राप्त पुण्य कभी समाप्त नहीं होता।
इस दिन दान करना केवल वस्तु देना नहीं, बल्कि अपने अहंकार को त्यागना भी है। यह मन को शुद्ध करता है और जीवन में अच्छे कर्मों का मार्ग खोलता है।
अन्न दान को सबसे बड़ा दान माना गया है। किसी भूखे को भोजन कराना भगवान की सेवा के समान माना जाता है। गर्मी के समय सत्तू, गुड़ और ठंडा जल दान करना विशेष पुण्य देता है।
जल दान भी बहुत महत्वपूर्ण है। प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा मानव धर्म है। इस दिन मिट्टी के घड़े में जल भरकर दान करने से पितरों को शांति मिलती है।
इसके अलावा वस्त्र दान, गौ दान और जरूरतमंदों को जूते-चप्पल देना भी बहुत पुण्यकारी माना गया है।
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अक्षय तृतीया पर क्या करें (Akshaya Tritiya 2026 Par Kya Kare)
इस पवित्र दिन कई शुभ कार्य किए जाते हैं। भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा, कुबेर देव की आराधना, पवित्र नदियों में स्नान और हवन करना बहुत शुभ माना जाता है।
इस दिन सोना, आभूषण या सिक्के खरीदना भी शुभ होता है। साथ ही विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य भी इस दिन किए जा सकते हैं। जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान देना भी बहुत पुण्य देता है।
अक्षय तृतीया पूजन विधि (Akshaya Tritiya 2026 Pooja Vidhi)
अक्षय तृतीया भगवान विष्णु के लक्ष्मी-नारायण रूप को समर्पित है और यह दिन कुबेर देव से भी जुड़ा हुआ है।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। यदि गंगा स्नान संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
स्नान के बाद हाथ में जल लेकर पूजा या व्रत का संकल्प लें। फिर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा पीले फूल, चंदन, धूप और दीप से करें।
भगवान को सत्तू, ककड़ी, चने की दाल और फल का भोग लगाएं। साथ ही “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
FAQs
प्रश्न.1: आखा तीज क्यों मनाई जाती है?
उत्तर: आखा तीज, जिसे अक्षय तृतीया भी कहा जाता है, इसलिए मनाई जाती है क्योंकि इस दिन किए गए शुभ कार्य और दान-पुण्य का फल कभी समाप्त नहीं होता। यह वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला अत्यंत शुभ पर्व है।
प्रश्न.2: अक्षय तृतीया पर किसकी पूजा की जाती है?
उत्तर: इस दिन मुख्य रूप से भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा की जाती है। साथ ही धन के देवता कुबेर देव की आराधना भी की जाती है, जिससे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
प्रश्न.3: अक्षय तृतीया नाम क्यों पड़ा?
उत्तर: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए सभी शुभ कार्यों का फल कभी खत्म नहीं होता, बल्कि बढ़ता रहता है। इसी कारण इस तिथि को “अक्षय” तृतीया कहा गया है।
प्रश्न.4: अक्षय तृतीया 2026 पर क्या करना चाहिए?
उत्तर: इस दिन जरूरतमंद लोगों को दान देना, भगवान लक्ष्मीनारायण और कुबेर देव की पूजा करना, सोना या रत्न खरीदना और नए कार्यों की शुरुआत करना बहुत शुभ माना जाता है।
प्रश्न.5: अक्षय तृतीया पर सोना क्यों खरीदा जाता है?
उत्तर: अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना एक पुरानी परंपरा है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार सोना माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इस दिन खरीदा गया स्वर्ण “अक्षय” यानी कभी न समाप्त होने वाली समृद्धि का प्रतीक होता है, इसलिए इसे बहुत शुभ माना जाता है।
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