गोमेद रत्न (Gomed Stone) राहु ग्रह से संबंधित होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से इसे धारण करने का उद्देश्य राहु के अशुभ प्रभावों को शांत करना और उसके सकारात्मक फलों को प्राप्त करना है। किंतु इसे धारण करने से पहले सही विधि और नियमों को जानना आवश्यक है।
1. गोमेद रत्न किस धातु में पहनें (Gomed Ratna Kis Dhatu me Pehne)
गोमेद रत्न को प्रायः चांदी में मढ़वाकर धारण करना सबसे शुभ माना जाता है। चांदी का संबंध चंद्रमा से है और यह राहु की अस्थिर ऊर्जा को संतुलित करता है।
कुछ मामलों में इसे पंचधातु (सोना, चांदी, तांबा, जस्ता और लोहा) में भी धारण किया जाता है, परंतु सर्वाधिक प्रचलित धातु चांदी ही है।
2. गोमेद रत्न किस दिन धारण करना चाहिए (Gomed Ratna Kis Din Pehne)
- ज्योतिष के अनुसार गोमेद रत्न धारण करने के लिए शनिवार का दिन सबसे उपयुक्त है।
- इसे सूर्यास्त के बाद शाम के समय पहनना उत्तम माना गया है।
- यदि अमावस्या अथवा पूर्णिमा का दिन शनिवार को पड़े तो इस दिन इसका प्रभाव और भी अधिक शुभकारी होता है।
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3. गोमेद रत्न की पहचान (Gomed Ratna Ki Pehchan)
- गोमेद रत्न का रंग सामान्यतः शहद या मधु जैसा होता है।
- यह रत्न पूरी तरह से साफ, पारदर्शी तथा बिना किसी दरार या धब्बे के होना चाहिए।
- यदि रत्न में दरार, धुंधलापन या धात्विक चमक दिखाई दे, तो वह अशुद्ध माना जाता है।
- प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए हमेशा किसी विश्वसनीय और प्रमाणित स्रोत से ही गोमेद खरीदना चाहिए।
4. गोमेद रत्न किसे पहनना चाहिए (Gomed Ratna Kise Pehna Chahiye)
1. जिन व्यक्तियों की कुंडली में राहु ग्रह अशुभ स्थिति में हो, या राहु की महादशा, अंतरदशा चल रही हो, उन्हें यह रत्न धारण करना चाहिए।
2. यह रत्न उन लोगों के लिए भी लाभकारी होता है जो
- लगातार मानसिक तनाव, भ्रम या भय का सामना कर रहे हों।
- करियर या व्यापार में बार-बार बाधाओं से जूझ रहे हों।
- न्यायालयी मामलों, शत्रुओं या षड्यंत्रों से परेशान हों।
इसे पहनने से राहु के नकारात्मक प्रभाव कम होकर आत्मविश्वास, स्थिरता और सफलता की प्राप्ति होती है।
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5. गोमेद रत्न किस उंगली में पहनना चाहिए? (Gomed Stone in Which Finger)
- गोमेद रत्न को हमेशा दाएं हाथ (working hand) की मध्यमा अंगुली (Middle Finger) में पहनना चाहिए।
- यह उंगली शनि और राहु से संबंधित मानी जाती है, जिससे रत्न का प्रभाव अधिक प्रबल होता है।
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6. गोमेद रत्न धारण करने का दिन और समय (Gomed Wearing Day and Time)
- दिन (Day): गोमेद रत्न धारण करने का सबसे उपयुक्त दिन शनिवार माना जाता है।
- समय (Time): इसे पहनने का सबसे अच्छा समय राहु काल होता है। राहु काल स्थान और समय अनुसार बदलता रहता है, लेकिन सामान्यतः यह शाम 4:30 बजे से 6:00 बजे के बीच आता है। इस समय रत्न धारण करने से इसका प्रभाव और अधिक शुभकारी होता है।
धारण करने की प्रक्रिया
1. धारण करने से पूर्व गोमेद रत्न को शुद्ध करना अनिवार्य है।
- इसके लिए एक कटोरी में गाय का कच्चा दूध, गंगाजल, शहद और तुलसी के पत्ते डालकर उसमें 20 – 30 मिनट तक रत्न को डुबोकर रखें।
- इसके बाद साफ पानी से धोकर कपड़े से पोंछ लें।
2. पूजा स्थल पर रत्न को रखकर राहु देव की प्रार्थना करें।
3. “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः” इस राहु मंत्र का 108 बार जाप करके रत्न को अंगुली में धारण करें।
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विशेष ध्यान रखने योग्य बातें
- गोमेद रत्न को नियमित रूप से गंगाजल से शुद्ध करते रहें।
- इसे किसी अन्य व्यक्ति को उधार या साझा न करें।
- राहु की दशा के समय इसे निरंतर धारण करना चाहिए।
- गोमेद को नीलम (नीलमणि) के साथ पहनना शुभ है, परंतु हीरा या मोती के साथ धारण करना वर्जित माना गया है।
निष्कर्ष
गोमेद रत्न धारण करना एक गंभीर ज्योतिषीय उपाय है, जिसे केवल योग्य ज्योतिषी की सलाह के बाद ही अपनाना चाहिए। सही धातु, दिन, समय और विधि से धारण किया गया गोमेद न केवल राहु के दुष्प्रभावों को कम करता है, बल्कि जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और प्रगति भी प्रदान करता है।
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